ख़ैर, गीत के बोल यहाँ पढ़ें।
Tuesday, September 29, 2009
कमीने फ़िल्म का शीर्षक गीत सुनने पर
यू-ट्यूब (Youtube) पर कमीने फ़िल्म का शीर्षक गीत "कमीने कमीने" के प्रत्युत्तर में सबसे ताज़ा टिप्पणी थी—This song defines my entire life (यह गीत मेरे सम्पूर्ण जीवन को परिभाषित करता है)। इस एक टिप्पणी मे कितने ही लोगों की अनकही टिप्पणियां छिपी हो सकती हैं। आजकल ऐसे गीत कम ही सुनने को मिलते हैं जिनमें पात्र अपने आप को संबोधित कर रहा हो। फ़िल्मी गीतों में इमानदारी लगभग नदारद है क्योंकि अपने आप से बात करने की कला हम खोते जा रहे हैं। भारतीय दर्शन (Indian philosophy) सिखाता है कि हम अपनी सच्चाई को जानें। हम वास्तव में हैं क्या। यूनानी दर्शन भी यही सीख देता था—Know Thyself. हमाने प्राचीन दर्शनों में यह माना जाता रहा है कि हमारा देवत्व, हमारे मनुष्यत्व की सर्वोत्तम तस्वीर हमारे अंदर ही छिपी है। लेकिन हमारा अनुभव अड़ियल है। वह कहता है हम अपने भीतर देखें तो कमीनगी पाते हैं। फ़िल्म मैंने अभी तक नहीं देखी तो कह नहीं सकता की यह गीत किस मौके पर आता है और इसके बाद यह किरदार किस तरह का रास्ता अख़्तियार करता है। लेकिन जब हम इस तरह के पलों में अपने आप को देखते हैं तो बहुत आसान होता है अपनी कमीनगी को अपनी ज़रूरत, या मजबूरी, यहां तक की उसे अपनी प्रतिभा मान कर उसी रास्ते पर चलते जाना। हमारी ज़िंदगी की परिभाषा का निर्माण दरअसल इसी पल से शुरू होता है। ज़िंदगी की परिभाषा कैसी होगी? क्या मैं उसे ख़ुद लिख सकता हूँ? बदल सकता हूँ?
Monday, October 20, 2008
सफेद बाघ का शिकार
अरविंद अडिगा के बुकर पुरस्कार से सम्मानित उपन्यास द व्हाइट टाइगर पढ़ चुकने के तीन दिन बाद तक मेरे ज़हन में ये बात क्यों नहीं आई? भारत में अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं के टकराव की बहसें होनी तो प्रत्याशित थीं। यह बात भी समझ में आती की साहित्यिक दृष्टि से यह नॉवल शार्टलिस्ट में रहे बाकी उपन्यासों से किस प्रकार बेहतर है, इस मुद्दे पर भी विवाद होगा। पर बहस का एक बिंदु यह होगा कि अंग्रेज़ों ने इस उपन्यास को पुरस्कार देने के लिए इसलिए चुना क्योंकि यह उपन्यास भारत की गरीबी, भ्रष्टाचार, गंदगी को उजागर करता है मेरी समझ के राडार में नॉवल पढ़ने के तीन दिन तक नहीं आया। हम तो इस उम्मीद में थे कि लोग ख़ुश होंगे कि अंग्रेज़ी में लिखने वाले किसी ने विदेशी पर्यटकों के लिए रंगीन, सुगंधित, मनमोहक भारत की बजाय एक यथार्थवादी तस्वीर देने का हौसला किया है।
खैर, कल एक सभा में शिरकत करते हुए यह बात सुनने को मिली तो कुछ हैरानी हुई। क्यों लोग इस सांस्कृतिक पैरानोइया से मुक्त नहीं हो पा रहे? अंग्रेज़ी भाषा में, या पश्चिम में जो भी हरकत होती है उसे अपने खिलाफ़ साज़िश क्यों माना जाता रहे? खैर, उपन्यास सशक्त है। कथ्य और शिल्प दोनों की दृष्टि से। मेरी जानकारी के मुताबिक मुल्क राज आनंद के अनटचेबल और कुली के बाद भारत में अंग्रेज़ी में लिखा गया पहला ऐसा उपन्यास जो भारत के निचले/कुचले तबके को एक पूरा वृत्तांतिक कैनवस देता है, और इमानदारी से। अडिगा और आनंद में अंतर है तो यह कि आनंद के उपन्यास में उन्नत समाजवाद का भव्य स्वप्न दिखाया जा रहा था जबकि अडिगा का द ग्रेट सोशलिस्ट स्वयं भ्रष्टाचार और अंधकार की धुरी है।
अपने वृतांतिक विन्यास में पश्चिम की किसी भी प्रकार की सक्रिय भूमिका को यह उपन्यास कितनी दृढ़ता से खारिज करता है इसका अंदाज़ा इस बात से लगता है कि मुख्य पात्र किसी अमेरिकी या ब्रितानी हुक्मरान की बजाय अपने से भी अधिक पूर्वी सभ्यता के प्रधान शासक को संबोधित करता है। पर अंततः उपन्यास भारतीय है, भारत से मुखातिब है। उपन्यास किसी भी किस्म की लिसलिसी भावुकता में लिप्त नहीं। धर्म, संस्कृति और प्राचीन सभ्यता के मामले पूरी तरह बेअदब। ऐसे उपन्यास कम ही लिखे गए हैं। अच्छा यही होगा कि बजाय किसी षड्यंत्र को सूंघ लेने के, इस प्रकार के लेखन को उसकी शर्तों पर पढ़ा जाए।
शिकार करने से पहले सोचें, सफ़ेद बाघ दुर्लभ होते हैं।
खैर, कल एक सभा में शिरकत करते हुए यह बात सुनने को मिली तो कुछ हैरानी हुई। क्यों लोग इस सांस्कृतिक पैरानोइया से मुक्त नहीं हो पा रहे? अंग्रेज़ी भाषा में, या पश्चिम में जो भी हरकत होती है उसे अपने खिलाफ़ साज़िश क्यों माना जाता रहे? खैर, उपन्यास सशक्त है। कथ्य और शिल्प दोनों की दृष्टि से। मेरी जानकारी के मुताबिक मुल्क राज आनंद के अनटचेबल और कुली के बाद भारत में अंग्रेज़ी में लिखा गया पहला ऐसा उपन्यास जो भारत के निचले/कुचले तबके को एक पूरा वृत्तांतिक कैनवस देता है, और इमानदारी से। अडिगा और आनंद में अंतर है तो यह कि आनंद के उपन्यास में उन्नत समाजवाद का भव्य स्वप्न दिखाया जा रहा था जबकि अडिगा का द ग्रेट सोशलिस्ट स्वयं भ्रष्टाचार और अंधकार की धुरी है।
अपने वृतांतिक विन्यास में पश्चिम की किसी भी प्रकार की सक्रिय भूमिका को यह उपन्यास कितनी दृढ़ता से खारिज करता है इसका अंदाज़ा इस बात से लगता है कि मुख्य पात्र किसी अमेरिकी या ब्रितानी हुक्मरान की बजाय अपने से भी अधिक पूर्वी सभ्यता के प्रधान शासक को संबोधित करता है। पर अंततः उपन्यास भारतीय है, भारत से मुखातिब है। उपन्यास किसी भी किस्म की लिसलिसी भावुकता में लिप्त नहीं। धर्म, संस्कृति और प्राचीन सभ्यता के मामले पूरी तरह बेअदब। ऐसे उपन्यास कम ही लिखे गए हैं। अच्छा यही होगा कि बजाय किसी षड्यंत्र को सूंघ लेने के, इस प्रकार के लेखन को उसकी शर्तों पर पढ़ा जाए।
शिकार करने से पहले सोचें, सफ़ेद बाघ दुर्लभ होते हैं।
Friday, September 19, 2008
मन मेरा पतझड़ का पत्ता
इक्कीसवीं सदी में भक्ति गीत कैसे लिखा जाए? सुने सुनाए भक्ति काव्य को ही रीसाइकल करते रहने का ख़तरा बना रहता है। हम वो मनुष्य नहीं रह गए। ईश्वर पर भरोसे और विश्वास के मायने भी बदल गए हैं। हम समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, तथा नैचुरल सांईस को अच्छे से समझते हैं। हमारी अपने बारे में, परमेश्वर के बारे में धारणाएं बदली हैं। इस बीच क्या भक्ति साहित्य केवल साहित्य की विधा या साहित्य के विकास की एक ऐतिहासिक अवस्था बन कर रह गया है।
मनुष्य के भय, चिंताएं, तनाव अभी समाप्त नहीं हुए। किसी को पुकारना की उसकी ज़रूरत अभी पुरानी नहीं पड़ी।
मनुष्य के भय, चिंताएं, तनाव अभी समाप्त नहीं हुए। किसी को पुकारना की उसकी ज़रूरत अभी पुरानी नहीं पड़ी।
मन मेरा पतझड़ का पत्ता कांपे है प्रभु कांपे है
मन मेरा पतझड़ का पत्ता कांपे है प्रभु कांपे है
दुख संकट की आंधी आई आंधी आई आंधी आई
सुबह अंधेरा रात सियाही रात सियाही रात सियाही
नही रोशनी किसी ओर भी नज़र नहीं कुछ आवे है
मन मेरा पतझड़ का पत्ता कांपे है प्रभु कांपे है
तूफ़ानो को तुमने प्रभु जी शांत किया हां शांत किया
गहरे पानी की लहरों को डांट दिया फिर डांट दिया
तुम्हरी कोमल वाणी से मेरा डगमग मन बल पावे है
मन मेरा पतझड़ का पत्ता कांपे है प्रभु कांपे है
मन मेरा पतझड़ का पत्ता कांपे है प्रभु कांपे है
दुख संकट की आंधी आई आंधी आई आंधी आई
सुबह अंधेरा रात सियाही रात सियाही रात सियाही
नही रोशनी किसी ओर भी नज़र नहीं कुछ आवे है
मन मेरा पतझड़ का पत्ता कांपे है प्रभु कांपे है
तूफ़ानो को तुमने प्रभु जी शांत किया हां शांत किया
गहरे पानी की लहरों को डांट दिया फिर डांट दिया
तुम्हरी कोमल वाणी से मेरा डगमग मन बल पावे है
मन मेरा पतझड़ का पत्ता कांपे है प्रभु कांपे है
Tuesday, September 2, 2008
पहचान का संघर्ष पुराना है
मसीही समुदाय, या जिसे मसीही कलीसिया भी कहा जाता है, के आरंभिक दिनों में पहचान का मुद्दा एक घोर संघर्ष बन कर यीशु के शिष्यों के सामने था। पौलुस जो पहले शाऊल नामक फ़रीसी थे को यह लगता था कि यहूदी धर्मशास्त्रों के बारे में उनकी समझ में कोई त्रुटि नहीं। नासरत निवासी यीशु के शिष्य प्राचीन एवं महान यहूदी धर्म में मिलावट कर रहे हैं तथा उनकी महान पहचान को चोट पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए कलीसिया का दमन करना अपनी पहचान को बचाए रखने का एकमात्र रास्ता था। परंतु यीशु के शिष्यों के लिए भी अपनी यहूदी विरासत का घमंड छोड़ना कोई आसान काम नहीं था। इब्रानी राष्ट्र के प्रत्येक जन के मन में यह बात घर कर गई थी कि वे विशिष्ट हैं, परमेश्वर के चुने हुए लोग हैं। इस बोध के साथ दूसरी जनसमूहों, राष्ट्रों और जातियों को तुच्छ जानना भी उनकी अपनी पहचान का हिस्सा था। पतरस को प्रभु ने एक दर्शन के द्वारा विशिष्ट और तुच्छ, शुद्ध और अशुद्ध के भेद को त्यागने का आदेश दिया। पतरस को यह सीखना था कि परमेश्वर की संपूर्ण कृपा गैर-यहूदियों पर भी बिना किसी हिचक और अंतर के होती है। हालांकि इस्राएल राष्ट्र रोमी साम्राज्यवाद का उपनिवेश था और शासक एवं शासित के बीच बहुत तनाव था फिर भी पतरस को कुरनेलियस नामक रोमी सेनापति को कलीसिया का हिस्सा स्वीकार करना था। इसी प्रसंग को लेकर कुछ दोहे
कौन पराया आपना का है शुद्ध अशुद्ध
प्रभु की किरपा सब पर है तू होता क्यों विरुद्ध
प्रभु की किरपा सबको है सबको प्रभु आनंद
खोल खिड़कियां दरवाज़े तू बैठा क्यों बंद
जिसको नीचा माने है उस पर भी किरपा होवेगी
मानव सीमा प्रभु न जाने किरपा की बरखा होवेगी
कौन पराया आपना का है शुद्ध अशुद्ध
प्रभु की किरपा सब पर है तू होता क्यों विरुद्ध
प्रभु की किरपा सबको है सबको प्रभु आनंद
खोल खिड़कियां दरवाज़े तू बैठा क्यों बंद
जिसको नीचा माने है उस पर भी किरपा होवेगी
मानव सीमा प्रभु न जाने किरपा की बरखा होवेगी
Sunday, August 31, 2008
शाऊल बना पौलुस
पिछले दिनों प्रेरितों के काम का वो हिस्सा पढ़ा जिसमें शाऊल नाम का अत्यंत प्रतिभावान फरीसी नवयुवक, यीशु नाम के किसी गलीली के शिष्यों के बढ़ते प्रभाव को लेकर बहुत उद्वेलित है। वो समझता है कि यीशु के शिष्य कोई नया पंथ बनाने का प्रयास कर रहे हैं जो प्राचीन यहूदी धर्म के लिए खतरा है। इस नई ईशनिंदा को रोकने के लिए वह प्रमुख पुरोहितों से आदेश पाकर दमिश्क के यीशु भक्तों को बंदी बनाकर यरुशलेम लाना चाहता है। परंतु दमिश्क जाते हुए रास्ते में उसका साक्षात्कार स्वयं यीशु से होता है और वह जो भक्तों को बंदी बनाने के लिए निकला था स्वयं शिष्य बन जाता है। इस घटना को दोहों में लिखने की प्रेरणा मिली तो कुछ इस प्रकार का परिणाम सामने आया।
मोहे सतावन क्यों चले क्यों चले चाल घनघोर
मेरा प्रेम परचारेगा तू पग पग चल हर ओर
क्या सोचा पौलूस ने क्या हुआ नतीजा जान
भक्तन को बांधन गया और भक्त बनी पहचान
बंध आया भक्तन के जैसे प्रभु प्रेम का पाश
आंखों का परदा गिरा अज्ञान हुआ फिर नाश
प्रभु प्रेम का जादू है ये प्रभु प्रेम की माया
बैरी मिलता बैरी से बन मीत क्रूस की छाया
प्ररितों के काम: बाइबल के दूसरे हिस्से नए नियम की पांचवी पुस्तक। इस पुस्तक में यीशु मसीह के जाने के बाद मसीही समुदाय के निर्माण का वर्णन है।
फरीसी: यहूदी धर्म का अत्यंत प्रभावशाली पंथ जो धर्मशास्त्रों का गहराई से अध्ययन करने और उसके विधि विधानों के मानने पर अत्याधिक ज़ोर दिया करता था।
मोहे सतावन क्यों चले क्यों चले चाल घनघोर
मेरा प्रेम परचारेगा तू पग पग चल हर ओर
क्या सोचा पौलूस ने क्या हुआ नतीजा जान
भक्तन को बांधन गया और भक्त बनी पहचान
बंध आया भक्तन के जैसे प्रभु प्रेम का पाश
आंखों का परदा गिरा अज्ञान हुआ फिर नाश
प्रभु प्रेम का जादू है ये प्रभु प्रेम की माया
बैरी मिलता बैरी से बन मीत क्रूस की छाया
प्ररितों के काम: बाइबल के दूसरे हिस्से नए नियम की पांचवी पुस्तक। इस पुस्तक में यीशु मसीह के जाने के बाद मसीही समुदाय के निर्माण का वर्णन है।
फरीसी: यहूदी धर्म का अत्यंत प्रभावशाली पंथ जो धर्मशास्त्रों का गहराई से अध्ययन करने और उसके विधि विधानों के मानने पर अत्याधिक ज़ोर दिया करता था।
Sunday, December 30, 2007
प्रेम मिलन को नैन तरसे
अराधना के प्रमुख गायक एवं संगीतकार क्रिस ने अपनी नई एलबम अमृतवाणी के पटाक्षेप से पहले उसके बारे में कहा था कि ख्रीस्त भजनों का यह संकलन उनका सबसे उम्दा संकलन है। अमृतवाणी को सुनने के बाद क्रिस के इस वक्तव्य पर संदेह करने की कोई गुंजाईश नहीं। भारतीय एवं पाश्चात्य, शास्त्रीय एवं लोक तथा अंग्रेज़ी एवं हिंदी का अत्यंत निपुण सम्मिश्रण इस संकलन में नज़र आता है। अराधना की यह चौथी एलबम है। इससे पहले दीप जले (2000), मार्ग दर्शन (2002), सत्संग (2004) में अपनी निरंतर परिक्व होती कला का परिचय देते रहे हैं और अब तो चौका लग ही गया है।पहला भजन 'जयदेव' ब्रह्मबांधव उपाध्याय द्वारा रचित वंदनागीत है। भजन संस्कृत में है और क्रिस ने इसे संस्कृत में ही गाया है। 'जयदेव जयदेव नरहरि' का रिफ्रेन भजन को ग़ज़ब की उर्जा देता है और सुनने वाले को विभोर करता है बाकी सारी एलबम के लिए। दूसरा भजन 'यीशु राजा' मुमताज़ मसीह का लिखा हुआ है, संगीत है हसन अली ख़ान का और गाया है क्रिस ने। अराधना से पहले क्रिस 'ओलियो' नाम के म्यूज़िक बैण्ड के साथ जुड़े हुए थे और उस ग्रूप की दूसरी एलबम 'अपरम्पार' में इस भजन को स्वर दिए थे हसन अली ख़ान ने ही। दोनों ने ही इसे बहुत खूबसूरती से गाया है। भजन की गहराई और माधुर्य के लिए दोनों की ही गायकी को सुनें। खैर, तीसरा भजन 'अमृतवाणी' शुरु होता मंजीरों की वाणी से जिसे सुन कर मेरी पत्नी का कहना है कि यह भजन आपको सीधा बनारस के घाट पर हो रहे कीर्तन में ले जाता है। यह है टिपिकल सत्संग भजन। बार बार शब्दों का दोहराना, सरल धुन, सीधी सी बातें। इस भजन में कोरस का स्वर मुखर है। भजन के शब्द हैं साधु नितेश के। इसके बाद आता इस संकलन का सबसे ज़्यादा मस्ती से गाया और कम्पोज़ किया गया भजन 'भजो रे'। स्वामी अनिल देव, क्रिस और रमन सिंह ने इस भजन के शब्द और संगीत विशेष ईश्वरीय अनुग्रह में रहकर तैयार किए होंगे। इस भजन के बाद है चार वाक्यों का संगीतबद्ध विश्वासवचन 'ध्यानमूलम्'। क्रिस की मननशील आवाज़ का साथ दिया है सधे हुए तानपुरे और सारंगी ने। 'मन मेरा क्यों डोले रे' छठा भजन है। अब तक आपने सितार, गिटार, तबले, तानपुरे और बांसुरी के साथ गिटार की स्ट्रमिंग ज़रूर सुन ली होगी। अब इस भजन में वेस्टर्न ड्रम्ज़ का भी प्रमुखता से प्रयोग किया गया है। क्रिस और पीटर हिक्स का रॉक म्यूज़िक का अनुभव बहुत की खूबसूरत ढंग से यहां ज़ाहिर होता है। आध्यात्मिक आनंद और भक्ति रस की लहरों के ज्वार भाटे में एक ज़ोरदार जोश यहां मिलता है। रमन और क्रिस के लिखे इस भजन में पीटर हिक्स के अंग्रेज़ी में दिए गए बैकअप वोकल्स एक अनूठा आयाम ले आते हैं। गिटार और सितार के सम्मिश्रण के साथ आरंभ होता है अगला भजन 'प्रेम मिलन'। क्रिस, रमन और साधु नितेश ने शब्दबद्ध किया है एक और टिपिकल सत्संग भजन हालांकि रॉक संगीत के चिन्ह यहां भी हैं और बहुत खूबसूरत। आगे है यीशुदास और क्रिस हेयल द्वारा लिखी गई एक प्रार्थना, 'प्रभु हमारे जीवन में भर दो अपना आनंद रे'। सुंदर शब्द और सुंदर गायकी। 'खटखटाओ' में यीशुदास और क्रिस ने सुसमाचारों में पाए जाने वाले यीशु ख्रीस्त के शब्दों को भजन का रूप दिया है। जिन सुननेवालों को अराधना की डिस्कोग्राफ़ी की जानकारी है वे जानते हैं कि क्रिस के लिए नेपाली भजन गाना अनिवार्य है। 'आयो है आयो' किरन प्रधान द्वारा लिखा और संगीतबद्ध किया एक मर्मस्पर्शी नेपाली भजन है जिस पर हिंदी भाषी भी बहुत झूमने वाले हैं। एलबम का अंत जयदेव जयदेव नरहरी आलाप के साथ ही होता है। क्रिस और कोरस के लगातार दोहराए जा रहे आलाप में एक बार फिर पीटर हिक्स की आवाज़ सुनती है जो संस्कृत शब्दों का ख़ूबसूरत अंग्रेज़ी अनुवाद करते हैं।
भजनों के बारे में बस इतना ही। एलबम का एक और पक्ष जो बहुत ही आकर्षित करता है वह है कवर आर्ट या आवरण चित्र। ज्योति साही की पेंटिंग में मरियम बालक यीशु को गोद में लिए बैठी हैं। इस चित्र पर विस्तार से बात फिर आगे करेंगे।
Tuesday, November 6, 2007
अंग्रेज़ी, उर्दू, बचपन, गीत
आज सुबह एक सहकर्मी ने एक दिलचस्प खबर कि ओर ध्यान दिलाया। अंग्रेज़ी के एक रिटायर्ड प्रोफ़ैसर ने अंग्रेज़ी रोमांटिक कवि विलियम वर्डस्वर्थ की नज़्मों का उर्दू अनुवाद किया है। एक नमूना उस खबर में भी छपा था। तर्जुमा काफ़ी अच्छा लगा। यह बात में बहुत पहले से महसूस करता रहा हूँ कि अंग्रेज़ी का तर्जुमा उर्दू में काफ़ी स्वभाविक लगता है। बचपन में कई क्रिसमस कैरल्स हमने उर्दू में ही गाए हैं। कानवेंट में नहीं पढ़े इसलिए अंग्रेज़ी कैरल्स का बोध बहुत बाद में हुआ। संडे स्कूल में हम उर्दू के कैरल्स ही गाया करते थे।
न झूला न खटोला अपना सर रखने को
प्यारे यीशु के लिए जगह चरनी में थी
आसमान में सब सितारे देखते जाते उसको
छोटा यीशु ख़ुदावंद घास पर सोता है जो
जब बैलों की आवाज़ से बच्चा जाग उठता था
प्यारा यीशु ख़ुदावंद कभी रोता न था
ऐ यीशु सारे दिल से करता प्यार मैं तुझको
निगाह कर तू आसमान से सुबह तक हाफ़िज़ हो
ये बहुत बाद में पता चला कि यह तो Away in the manger का उर्दू तर्जुमा है
Away in a manger, no crib for his bed,
the little Lord Jesus laid down his sweet head.
The stars in the bright sky looked down where he lay,
the little Lord Jesus asleep on the hay.
The cattle are lowing, the baby awakes,
but little Lord Jesus no crying he makes.
I love thee, Lord Jesus! Look down from the sky,
and stay by my side until morning is nigh.
एक और नमूना
ऐ सब इमानदारों खुश औ' ख़ुर्रम होके
अब आओ चलें हम ता-बैतलहम
देखें नौज़ादा मालिक कुल जहान का
हम उसे सिजदा करें हम उसे सिजदा करें
हम उसे सिजदा करें रब्ब महमूद
ये तर्जुमा है O come all ye faithful का
इनके अलावा और भी हिंदी, उर्दू, पंजाबी के मौलिक भजन, गीत वगैरह गाते थे पर पाश्चात्य धुनों पर आधारित होने से यह गीत उस समय भी कुछ अलग से लगते थे। शायद अंग्रेज़ी hymns होने के कारण आम गीतों से लम्बे होते थे। जब कलीसिया (church)के बच्चे बड़े दिन पर क्रिसमस ड्रामा करते थे तो आखरी दृश्य में भी एक इसी तरह का लंबा गीत गाया जाता था। वह इसलिए कि तीन मजूसी (three magi) जब अपने अपने तोहफे लेकर बालक यीशु के पास जाते हैं तो सबको अपने-अपने हिस्से की लाइमलाईट में पूरा स्वाद लेने का मौका मिलता था। गीत के हर एक अंतरे पर एक मजूसी अपना तोहफा लेकर दर्शकों के बीच में से चलकर मरियम, यूसुफ़, यीशु, गडरियों, फ़रिश्तों के बीच अपनी जगह ले लेता था। यह रोल अक्सर बड़े बच्चों को मिलता था इसलिए इस रोल को काफ़ी अहमियत दी जाती थी। गडरिये छोटे बच्चे होते थे जिनमें से ज़्यादातर का सपना होता था कि वे भी अगले साल मजूसी का रोल करेंगे। खैर, गीत पेश किया जाए
हम तीन बादशाह मशरिक़ के हैं, नज़्रें भी सब वहीं की है
सफ़र दूर का पीछा नूर का करके हम आए हैं
ऐ रात के तारे अजूबा, शाही तारे ख़ुशनुमा
आगे बढ़के, राह दिखाके, कामिल नूर तक पहुंचा
सोना लाया मैं के बादशाह, बैतलहम है जिसकी बारगाह
तू ताजदार हो, और आशकार हो, अबदी शहनशाह
मैं लोबान साथ ले आया हूँ, ताकी तुझको नज़्र मैं दूँ
दिल-ओ-जान से और ईमान से, तुझको ख़ुदा मानूँ
मुर्र मैं लाया, मौत का निशान, क्योंकि देगा तू अपनी जान
दुःख उठा के, खून बहा के, होवेगा तू कुर्बान
यह तर्जुमा है We three kings of orient are का
न झूला न खटोला अपना सर रखने को
प्यारे यीशु के लिए जगह चरनी में थी
आसमान में सब सितारे देखते जाते उसको
छोटा यीशु ख़ुदावंद घास पर सोता है जो
जब बैलों की आवाज़ से बच्चा जाग उठता था
प्यारा यीशु ख़ुदावंद कभी रोता न था
ऐ यीशु सारे दिल से करता प्यार मैं तुझको
निगाह कर तू आसमान से सुबह तक हाफ़िज़ हो
ये बहुत बाद में पता चला कि यह तो Away in the manger का उर्दू तर्जुमा है
Away in a manger, no crib for his bed,
the little Lord Jesus laid down his sweet head.
The stars in the bright sky looked down where he lay,
the little Lord Jesus asleep on the hay.
The cattle are lowing, the baby awakes,
but little Lord Jesus no crying he makes.
I love thee, Lord Jesus! Look down from the sky,
and stay by my side until morning is nigh.
एक और नमूना
ऐ सब इमानदारों खुश औ' ख़ुर्रम होके
अब आओ चलें हम ता-बैतलहम
देखें नौज़ादा मालिक कुल जहान का
हम उसे सिजदा करें हम उसे सिजदा करें
हम उसे सिजदा करें रब्ब महमूद
ये तर्जुमा है O come all ye faithful का
इनके अलावा और भी हिंदी, उर्दू, पंजाबी के मौलिक भजन, गीत वगैरह गाते थे पर पाश्चात्य धुनों पर आधारित होने से यह गीत उस समय भी कुछ अलग से लगते थे। शायद अंग्रेज़ी hymns होने के कारण आम गीतों से लम्बे होते थे। जब कलीसिया (church)के बच्चे बड़े दिन पर क्रिसमस ड्रामा करते थे तो आखरी दृश्य में भी एक इसी तरह का लंबा गीत गाया जाता था। वह इसलिए कि तीन मजूसी (three magi) जब अपने अपने तोहफे लेकर बालक यीशु के पास जाते हैं तो सबको अपने-अपने हिस्से की लाइमलाईट में पूरा स्वाद लेने का मौका मिलता था। गीत के हर एक अंतरे पर एक मजूसी अपना तोहफा लेकर दर्शकों के बीच में से चलकर मरियम, यूसुफ़, यीशु, गडरियों, फ़रिश्तों के बीच अपनी जगह ले लेता था। यह रोल अक्सर बड़े बच्चों को मिलता था इसलिए इस रोल को काफ़ी अहमियत दी जाती थी। गडरिये छोटे बच्चे होते थे जिनमें से ज़्यादातर का सपना होता था कि वे भी अगले साल मजूसी का रोल करेंगे। खैर, गीत पेश किया जाए
हम तीन बादशाह मशरिक़ के हैं, नज़्रें भी सब वहीं की है
सफ़र दूर का पीछा नूर का करके हम आए हैं
ऐ रात के तारे अजूबा, शाही तारे ख़ुशनुमा
आगे बढ़के, राह दिखाके, कामिल नूर तक पहुंचा
सोना लाया मैं के बादशाह, बैतलहम है जिसकी बारगाह
तू ताजदार हो, और आशकार हो, अबदी शहनशाह
मैं लोबान साथ ले आया हूँ, ताकी तुझको नज़्र मैं दूँ
दिल-ओ-जान से और ईमान से, तुझको ख़ुदा मानूँ
मुर्र मैं लाया, मौत का निशान, क्योंकि देगा तू अपनी जान
दुःख उठा के, खून बहा के, होवेगा तू कुर्बान
यह तर्जुमा है We three kings of orient are का
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